F&O Trading New Rules 2026: National Stock Exchange के MD और CEO Ashish Kumar ने हाल ही में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी F&O ट्रेडिंग को लेकर कुछ ज़रूरी बातें शेयर की हैं। उन्होंने नए फाइनेंशियल ईयर से ट्रेडिंग के तौर-तरीकों में बदलाव आने और इसके वॉल्यूम में कमी होने की भी बात कही है। सरकार और रेगुलेटर अब मार्केट में बढ़ते स्पेक्युलेटिव (सट्टेबाजी) ट्रेडिंग को कंट्रोल करने के लिए नए ठोस कदम उठाने की तैयारी में हैं।
F&O ट्रेडिंग वॉल्यूम में गिरावट के संकेत
आशीष चौहान ने एक कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि 1 अप्रैल 2026 से जब नया फिस्कल ईयर शुरू होगा, तब डेरिवेटिव्स मार्केट में एक्टिविटी की रफ़्तार धीमी हो सकती है। उनके मुताबिक, इसका सबसे बड़ा कारण ट्रांज़ैक्शन टैक्स में बढ़ोतरी और रेगुलेशन का सख्त होना है। एक्सचेंज को ऐसा लगता है कि इन बदलावों के बाद मार्केट में होने वाली एक्टिविटी में थोड़ी गिरावट आएगी। चौहान ने साफ किया कि जब रिवाइज़्ड सिक्योरिटी ट्रांज़ैक्शन टैक्स यानी STT लागू होगा, तब से ट्रेडिंग करने वालों के बिहेवियर में बदलाव देखने को मिल सकता है।
बढ़ते टैक्स की वजह से बढ़ेगा ट्रेडिंग का खर्चा
बजट 2026-27 के प्रस्तावों के तहत डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर लगने वाले STT को बढ़ाने का फैसला लिया गया है। 1 अप्रैल से फ्यूचर्स के सौदों पर टैक्स की दर 0.02% से बढ़कर 0.05% हो जाएगी। ऑप्शंस सेगमेंट में भी इसी तरह का इजाफा किया गया है, जहाँ प्रीमियम पर लगने वाला टैक्स 0.1% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है। इसके अलावा, ऑप्शंस को एक्सरसाइज करने पर लगने वाला चार्ज भी 0.125% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है। डेटा के हिसाब से समझें तो, अगर कोई 10 लाख रुपये का फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट करता है, तो उसे अब हर कॉन्ट्रैक्ट पर 300 रुपये का अतिरिक्त टैक्स देना होगा। इस बढ़ी हुई लागत का असर खास तौर पर उन लोगों पर पड़ेगा जो बड़े, शॉर्ट-टर्म ट्रेड करते हैं।
ट्रेडिंग के लिए तय हो सकती हैं कुछ जरूरी शर्तें
NSE चीफ ने एक और बड़ा सुझाव दिया है, जिसमें F&O ट्रेडिंग में हिस्सा लेने के लिए “minimum eligibility” की मांग की गई है। उनका कहना है कि भारत जैसी बढ़ती इकॉनमी में, कम इनकम वाले लोगों को बिना सोचे-समझे सट्टेबाजी में शामिल होने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। आशीष चौहान ने सुझाव दिया है कि भारत को भी सिंगापुर और यूनाइटेड स्टेट्स जैसे देशों की तरह एक “eligibility filter” लागू करना चाहिए। इसका मतलब है कि केवल वही लोग इसमें शामिल हों जिन्हें इस रिस्की मार्केट की गहरी समझ हो और जिनके पास इसके उतार-चढ़ाव को झेलने की फाइनेंशियल ताकत हो। इस कदम का मकसद छोटे और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बड़े नुकसान से बचाना है।
सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए उठेंगे कड़े कदम
SEBI और वित्त मंत्रालय काफी समय से रिटेल ट्रेडिंग में उछाल को लेकर चिंतित हैं। SEBI के डेटा से पता चलता है कि डेरिवेटिव सेगमेंट में कदम रखने वालों में से 90% से ज़्यादा लोगों को घाटा होता है। इसी वजह से पिछले एक साल में रिस्क मैनेजमेंट को बेहतर करने और छोटे लोगों के बड़े नुकसान को रोकने के लिए कई नए नियम बनाए गए हैं। आशीष चौहानका कहना है कि स्टॉक मार्केट का असली मकसद लोगों को लंबे समय के लिए पैसे लगाने की आदत डालना है, न कि उसे सट्टेबाजी का जरिया बनाना। सरकार का इरादा टैक्स और कड़े नियमों के ज़रिए बाजार में सट्टेबाजी को कम करना और इसे सुरक्षित बनाना है। उनके बयानों से यह साफ है कि आने वाले समय में ट्रेडिंग के लिए एंट्री के नियम और भी कड़े किए जा सकते हैं।
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