Tata Steel Limited ने अपने इंटरनेशनल ऑपरेशन को और बेहतर बनाने के लिए अपनी सिंगापुर बेस्ड सब्सिडियरी कंपनी, T Steel Holdings PTE Ltd – TSHP में 264 मिलियन डॉलर यानी लगभग 2,401.50 करोड़ रुपये का नया इन्वेस्टमेंट किया है। इस इन्वेस्टमेंट के जरिए Tata Steel ने अपनी ही इस कंपनी के 261.90 करोड़ से ज्यादा नए शेयर खरीदे हैं ताकि इंटरनेशनल लेवल पर ऑपरेशन और कैपिटल स्ट्रक्चर को और मजबूती दी जा सके।
डील से जुड़ी खास बातें
इस पूरे डील की जानकारी कंपनी ने 26 फरवरी 2026 को शेयर बाजारों को दी है। Tata Steel ने T Steel Holdings के कुल 2,61,90,47,620 इक्विटी शेयर खरीदी किए हैं, जिनमें से हर शेयर की कीमत 0.1008 अमेरिकी डॉलर तय की गई है। इस इन्वेस्टमेंट के रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट कैलकुलेट करने के लिए 24 फरवरी, 2026 के रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के रेट का इस्तेमाल किया गया, जो 90.9661 रुपये प्रति डॉलर था।
इस इन्वेस्टमेंट के बाद भी T Steel Holdings पूरी तरह से Tata Steel के मालिकाना हक वाली विदेशी कंपनी बनी रहेगी। यह पूरा प्रोसेस SEBI के नियमों के अनुसार पूरा किया गया, और कंपनी के सेक्रेटरी और चीफ लीगल ऑफिसर, Parvatheesam Kanchinadham ने इस बारे में जरूरी जानकारी साझा की है ताकि कंपनी के ऑपरेशन में ट्रांसपेरेंसी बनी रहे।
पिछले एक साल में फंड इन्वेस्टमेंट का रिकॉर्ड
यह पहली बार नहीं है जब Tata Steel ने अपनी सब्सिडियरी में इन्वेस्ट किया है। कंपनी ने मई 2025 की शुरुआत में ही इंस्टॉलमेंट में इस इन्फ्यूजन की घोषणा करना शुरू कर दिया था। रिकॉर्ड के अनुसार, कंपनी ने 12 मई, 25 जून, 10 जुलाई, 26 अगस्त, 24 सितंबर, 29 अक्टूबर और 19 दिसंबर, 2025 के साथ-साथ 2 फरवरी, 2026 को भी इसी तरह के इन्वेस्टमेंट की घोषणा की। इस फंडिंग का इस्तेमाल मुख्य रूप से विदेशी कर्ज कम करने और कंपनी के यूरोपियन ऑपरेशन, खासकर टाटा स्टील UK लिमिटेड को फिर से शुरू करने के लिए किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर, फरवरी 2025 में, Tata Steel ने अपना कर्ज चुकाने के लिए 1,238 मिलियन डॉलर का बड़ा इन्वेस्टमेंट किया था।
कंपनी का हालिया परफॉर्मेंस और चुनौतियां
कंपनी के परफॉर्मेंस की बात करें तो, Q3 FY26 में Tata Steel ने काफी अच्छा परफॉर्म किया है। कंपनी का टोटल प्रॉफिट पिछले साल के 295 करोड़ रुपये के मुकाबले बढ़कर 2,730 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। टोटल ऑपरेटिंग रेवेन्यू भी 6% बढ़कर ₹57,02 करोड़ हो गया। भारत में स्टील प्रोडक्शन और डिलीवरी की स्पीड में भी 11% से 14% की बढ़ोतरी देखी गई है।
हालांकि, कंपनी को कुछ कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। Competition Commission of India (CCI) स्टील की कीमतों को लेकर Tata Steel और दूसरी कंपनियों के बीच मिलीभगत के आरोपों की जांच कर रहा है। इसके अलावा, दिसंबर 2025 तक कंपनी के खिलाफ लगभग 11.32 अरब रुपये के टैक्स और पेनल्टी की मांग वाला एक केस पेंडिंग है। इन हालात के बावजूद, कंपनी अपनी विदेशी यूनिट्स को फाइनेंशियल मदद देना जारी रखे हुए है।
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